Monday, May 9, 2011

teri yaad

पलकों की चिलमन से निकल कर ,


गालों की सेज पर ठहर गया ...

तेरी याद में अटका आसूँ,

रुकते - रुकते भी बह गया .....

दिल में दर्द है यह प्यार का मीठा सा ज़रा ,

ज़माने कि हवा लगते ही खारा कैसे हो गया ..........

5 comments:

  1. वाह वाह
    दर्द शब्दों में छलक आया
    शुभकामनाये

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  2. वाह क्या बात है.........बहुत खुबसूरत......शानदार

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  3. वाह क्या बात है, थोड़े से शब्दों मे बहुत कुछ कह दिया. very nice. please keep on writing so beautifully.

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  4. वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

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