Saturday, June 18, 2011

Pitaa ko

अब समझ सकती हूँ ,
 कैसे   विदा किया होगा ,
अपने दिल के टुकड़े को,
 कैसे जुदा किया होगा |
जीवन जीने की कला ,
सदा मुस्कुराने की अदा ,
तुम से ही तो पाई है |
आपके आशीष ने ,
हर राह सरल बनायीं है |
छुप गए हो उन तारों के बीच ,
जो कभी तुमने मुझे दिखलाये थे |
जानती हूँ तुम हो यहीं - कहीं ,
मेरे हमेशा आस - पास | |
किस्मत है मेरी की आप बने मेरे पिता,
मेरी बुनियाद , संस्कार और मान्यता .....




9 comments:

  1. very nice....dil ko chu gayi....god bless u

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  2. बहुत सुन्दर......पिता का दर्जा बहुत ऊँचा है |

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  3. भावुक कर देने वाली अभिव्यक्ति| पिता का दर्जा बहुत ऊँचा है |

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  4. पिता का दर्जा बहुत ऊँचा है |

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  5. बहुत अच्छा लिखती हैं आप.

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    कल 28/06/2011को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है-
    आपके विचारों का स्वागत है .
    धन्यवाद
    नयी-पुरानी हलचल

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  6. बहुत ही खूबसूरत.....इतने प्यारे एहसास....

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