Monday, November 28, 2011

पता नहीं ?


उनका मन बहुत दयालू है ,
प्रतिमाह फटी - पुरानी उतरन ,खिलौने ,
पास की झोपड़ -पट्टी में दे आती हैं |
पहनने वालों का तो पता नहीं ,
वह स्वयं अख़बारों में छप जाती हैं |

उनका मन बहुत उदार है ,
प्रतिवर्ष एक डरा- सहमा बालक ,
गाँव से उधार ले आती हैं ,
बच्चे का तो पता नहीं ,
वह स्वयं तारीफ़ तले दब जाती हैं |

उनका मन बहुत कोमल है ,
हर हफ्ते नारी निकेतन के चक्कर लगाते हैं ,
किसी मासूम कन्या को ,
अपने माली की बीवी बना लाते हैं|
माली का तो पता नहीं ,
वह रोज़ ताज़े गुलदस्ते सजवाते हैं |
इति.....

16 comments:

  1. आइना दिखाती हुई तश्वीर ....

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  2. ...मन को छूती बेहतरीन रचना...

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  3. apne bilkul sateek baat kahi hai ,,,,itne achhe andaz me,,,,wakai lajawab

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  4. बहुत ही कडवी सच्चाई को बखूबी उकेरा है…………शानदार धारदार अभिव्यक्ति।

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  5. बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

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  6. सुभानाल्लाह........दिखावे पर करारी चोट........बहुत शानदार रही.........हैट्स ऑफ इसके लिए|

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  7. बेहतरीन ।

    कल 30/11/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, थी - हूँ - रहूंगी ....

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  8. न जाने कितने ऐसे दयालु,उदार और कोमलमना लोग समाज में भरे पड़े हैं.....!
    एकदम सही और यथार्थ विवरण....
    सही शब्दों और भावों के साथ...
    आभार !!

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  9. aap abhi ka bahut bahut shukriyaa....

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  10. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....
    सादर बधाई...

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  11. this is the controversy. we all are selfish...

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  12. are vah...... teekha vyang ....badhai Poonam ji .

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