Tuesday, December 13, 2011

धूल

माना की तेरी नज़र में  मेरी कोई औकात नहीं ,
राह मे बिखरी धूल ही सही ,
मत भूल हवा की मनमानी ,
किरकिरी बन पड़ गयी तो ,
आँख मलता रहेगा ,
ता उम्र यूँ ही ...

9 comments:

  1. माना की तेरी नज़र में मेरी कोई औकात नहीं ,

    राह मे बिखरी धूल ही सही ,
    मत भूल हवा की मनमानी ,
    किरकिरी बन पड़ गयी तो ,
    आँख मलता रहेगा ,
    ता उम्र यूँ ही ...

    अति सुन्दर ....!!

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  2. waah bahut khub

    is dhul ke kya kahne ....

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  3. वाह ! क्या बात है ...बेहतरीन ...!

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  4. सच कहा है पूनम जी ... हवा से पंगा लेना ठीक नहीं ... कुछ भी हो सकता है ...

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