Sunday, April 15, 2012

याद आ रहे हो ...

आज बहुत नाजुक मिजाज है मौसम ,
ऐसे में तुम बहुत याद आ रहे हो ...
सफ़ेद- स्याह बादलों से झड़ती,
चाँदी- सी गिरती नर्म बूंदे...
हवा में है हल्की सी मदहोशी ,
पेड़ो ने झूम- झूम बिखराई पाती सारी...
राह में बिछी चांदनी की खुमारी ,
सर उठा देखूं घनघोर घटा में ,
इक तेरा चेहरा ही नजर आये ..
आज बहुत नाजुक मिजाज है मौसम ,
ऐसे में तुम बहुत याद आ रहे हो ...

11 comments:

  1. saral shabdon main shaandaar rachna likhti hain aap ,
    impresive,

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  2. याद है ही ऐसी...............
    चली आती है हर बदलते मौसम के संग.....................
    सुंदर भाव पूनम.
    अनु

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  3. bahut khubsurat post

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  4. सुंदर सरल मन के भाव.....

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  5. बहुत प्यारी रचना.

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  6. सर उठा देखूं घनघोर घटा में ,
    इक तेरा चेहरा ही नजर आये ..
    आज बहुत नाजुक मिजाज है मौसम ,
    ऐसे में तुम बहुत याद आ रहे हो ...
    very very soft and sweet lines.

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  7. बदलते मौसम में वो अक्सर याद आते हैं ... बहुत खूब लिखा है ...

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  8. आज बहुत नाजुक मिजाज है मौसम ,
    ऐसे में तुम बहुत याद आ रहे हो ...

    awesome and mind-blowing lines

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