Saturday, September 7, 2013

मेरा - तेरा बचपन

अतीत का वह पहला पन्ना ,
कितना सुखद , कितना भोला ,
न कोई चिंता न ही कोई फिकर ,
दोस्तों के संग बस धौल - धप्पा .... 
बारिश की बूंदों के संग - संग ,
छत पर जम कर खूब उछलना,
उड़ती पतंग के संग - संग ,
आसमान मे ऊंचे ही ऊंचे उड़ना ,
बना हवा मे महल और बुर्जी ,
पारियों के संग खूब विचरना..... 
माँ की आवाज़ को कर नाकारा,
गली मे रात होने तक खेलना ,
खाना - पीना किसीके भी घर,
अपना ही हो यह कब सोचना ,
घुटने की चोट पर धोती के कतरन ,
हल्दी - चूने का टपकता लेप ,
फिर भी करना जम कर हुड़दंग ,
अतीत का वह पहला पन्ना ,
कितना सुखद ...कितना भोला ......मेरा - तेरा बचपन .....!!!

16 comments:

  1. अतीत का वह पहला पन्ना ,
    कितना सुखद,कितना भोला,मेरा-तेरा बचपन ..

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,,,
    RECENT POST : समझ में आया बापू .

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया

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  2. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [09.09.2013]
    चर्चामंच 1363 पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें
    सादर
    सरिता भाटिया

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  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती,आभार।

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  4. कितना सुखद भोला . बचपन ..
    sach hai !!
    sundar...

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  5. वाह बचपन की याद दिला दी आपने

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  6. बड़े प्यारे अनुभव हैं बचपन के !

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  7. सुन्दर प्रस्तुति. आभार!


    कृपया आप सभी मित्र यहाँ भी पधारें, जाग उठा है हिन्दुस्तान ... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः15

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