Friday, December 10, 2010

Zindgi

जिंदा हूँ मगर , जिंदगी ढूनढती हूँ |
हैवानों के शहर में , इंसानों को ढूनढती   हूँ |
सोने - चाँदी के बाज़ार मे फूलों को ढूनढती   हूँ |
बंद घुटती दीवारों में , खुला आकाश ढूनढती   हूँ |
काली - भयावह रात में , रोशनी की रसधार ढूनढती   हूँ |
बनावटी - खोखली हंसी में , मासूम मुस्कराहट को ढूनढती   हूँ |
आधे - अधूरे शब्दों में , संवाद को ढूनढती   हूँ |
रुखी - सुखी इस जिंदगी में , प्यार का दीदार ढूनढती   हूँ |

6 comments:

  1. आज 14/08/2012 को आपकी यह पोस्ट (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

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  2. इस जिंदगी की तलाश कभी खत्म नहीं होगी

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  3. sahi likha hai apne......bahut khoob

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  4. bahut shukriya, mujhe is manch par shamil karne ke liye...aap sabhi ka abhar

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  5. जिंदा हूँ मगर , जिंदगी ढूनढती हूँ |
    हैवानों के शहर में , इंसानों को ढूनढती हूँ |
    bahut hi lajbab rachana .....abhar ke sath hi badhai

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