Monday, June 25, 2012

हाय ! तेरी इस अदा से मुझे प्यार हो गया ..

लपक कर मिली गले ,
नदी सागर से ...
सागर हौले से सकपकाया ,
धीरे से मुस्काया ...
नदी थी मस्त - अल्हड़ ,
चूम माथा सागर का, नदी  बोली ,
हाय ! तेरी इस झेंप से मुझे प्यार हो गया .
चल -चलते हैं कही दूर ,
अकेले में जहाँ ,
सिर्फ हों मैं और तू ..
तू और मै .....
खिलखिलाई फिर  बोली  ...क्या है ऐसी कोई जगह ..?
सागर सकुचाया ....
अरुणित मुख -- संकेत किया ,
उस तरफ  चट्टानों की ओर ..
वहाँ ..है एक निर्जन घाटी ,
पदचापों - शोर - से दूर ,
नदी आनंदित हो गुनगुनायी ,
बड़ी - बड़ी आंखे कर ,
हैरान हो  -- वाकई ?
चूम माथा नदी का ,बोला सागर ,
हाय ! तेरी इस अदा से मुझे प्यार हो गया ..।।

14 comments:

  1. बहुत खूब,मन को प्रभावित करती सुंदर अभिव्यक्ति ,,,,,

    RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: आश्वासन,,,,,

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  2. waah ye najariya bhi bada accha hai poonam jee....

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  3. तेरी इस अदा से मुझे प्यार हो गया , मन को प्रभावित करती सुंदर अभिव्यक्ति

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  4. बहुत सारगर्भित पक्तियां

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  5. बहुत खूब
    इस अदा पर किसे न प्यार हो जाए

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  6. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति....

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