Tuesday, January 29, 2013

पूरे चाँद की आधी रात

पूरे चाँद की आधी रात 

पिघलता मन ,
सुलगते एहसास ,
तेरो आंखो की बिल्लोरी चमक ,
मेरे कंगन की जादुई खनक ,
उफ़्फ़ ...उफ़्फ़ यह पूरे चाँद की आधी रात , 
धुत्त लम्हे ,
मौन जज़्बात ,
तेरे आगोश मे पिघलती मै,
मेरी खुशबू से गमकते तुम ,
उफ़्फ़ - उफ़्फ़ यह पूरे चाँद की आधी रात

8 comments:

  1. गहन प्रेम की सुन्दर अनुभूति लिए
    बेहद सुन्दर रचना..
    :-)

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  2. दीवाना बना के रख देगी ये पूरे चाँद की आधी रात...

    अनु

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  3. पिघलता मन ,
    सुलगते एहसास ,
    उफ़्फ़ - उफ़्फ़ यह पूरे चाँद की आधी रात,,,,

    प्रेम और अनुभूति की बेजोड़ प्रस्तुति,,,,,

    recent post: कैसा,यह गणतंत्र हमारा,

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  4. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर प्रस्तुति . हार्दिक आभार आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहि

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  5. ये पूरे चाँद की आधी रात...क्या बात है..? बहुत सुन्दर

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  6. धुत्त लम्हे ,
    मौन जज़्बात ,
    तेरे आगोश मे पिघलती मै,
    मेरी खुशबू से गमकते तुम ,
    उफ़्फ़ - उफ़्फ़ यह पूरे चाँद की आधी रात

    बहुत सुन्दर

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  7. शीर्षक की मनमोहक है - पूरे चाँद की आधी रात

    बहुत ही सुन्दर ।

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  8. जीवन के सही रूप को दर्शाती
    बहुत कहीं गहरे तक उतरती कविता ------बधाई

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