Monday, February 4, 2013

आ एक पल जी ले

आ बैठ पास, कुछ खामोशी पढ़ ले ,
ले हाथ , हाथों के दरमिया ,इन लकीरों को सुन ले ,
हो सके तो, छु इन पलकों को ,यह नमी चख ले ,
यह देख इन काजल की स्याह - धुंधली लकीरों मे ,
तेरी इबादत मे लिखी आयतों -सा कुछ बहता है ,
आ , ज़रा इन को बुदबुदा बार - बार ,
अपनी साँसों मे भर निर्मल कर दे ,
न हमसफर, न हम साया है तू ,
कैसे कहूँ ,आ इन कदमों से मिला कदम ,
आज तू भी एक छोटा सा गुनाह कर ले ,
एक पल दे, आ एक पल जी ले ....
एक पल ले, जा एक पल जी ले ..

10 comments:

  1. न हमसफर, न हम साया है तू ,.........सत्य ही कहा

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  2. Tusi Great Ho Ji,

    Aapka Andaje bayan Bahut hi Prabhavsheel Hai,

    Har Baar Kii Tarah Shaandaar

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  3. कैसे कहूँ ,आ इन कदमों से मिला कदम ,
    आज तू भी एक छोटा सा गुनाह कर ले ,,,,बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,,,,

    RECENT POST बदनसीबी,

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  4. कैसा है, क्या है, क्यों है ये किसी के भी सवालों का हल नहीं |
    बात ये है कि आपकी रचना को नज़र अंदाज़ करना कैसे भी सरल नहीं .. !!

    बहुत सुंदर !!

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  5. खूबसूरत नम ...एक पल का जीना ... बहुत खूब ...

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  6. लाजवाब और खूबसूरत प्रस्तुति | बधाई

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  7. बहुत ही सुंदर रचना है...

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