नहीं नहीं नहीं ....बस यही बुदबुदा रही थी बस मत पलटना , मत मूड कर देखना , मै न जा पाऊँगी , पर तुम तो हमेशा से रहे जिद्दी , मेरी सुनी कब जो अब सुनते , आखिर जाते- जाते पलट ही गए , हल्की सी चोट्टी हंसी और एक उंगली का इशारा , पलट कर , कर ही गए , देखो , अब न जा पाऊँगी , देखो तब से यही हूँ .... यहीं हूँ
तुम जा न सको इसलिए तो पलटा...
ReplyDeleteइशारा समझो तो सही :-)
अनु
तुम्हारी इसी अदा पर हम मर गए ॥:)
Deletewah behtreen
ReplyDeleteओ जाने वाले लौट के आजा......इतनी सर्दी में मारेगा क्या
ReplyDelete:)
Deleteआखिर जाते- जाते पलट ही गए ,
ReplyDeleteहल्की सी चोट्टी हंसी और एक उंगली का इशारा ,
पलट कर , कर ही गए ,
देखो , अब न जा पाऊँगी ,
देखो तब से यही हूँ .... यहीं हूँ
पूनम जी इतना कठिन मत लिखा करिए की आँखों में आंसू आ जाये
तुम तो हमेशा से रहे जिद्दी ,
ReplyDeleteमेरी सुनी कब जो अब सुनते ,
आखिर जाते- जाते पलट ही गए ,
हल्की सी चोट्टी हंसी और एक उंगली का इशारा !
बहुत खूब...
बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ..आभार
ReplyDeleteबहुत खूब , निराला अंदाज़ !
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