Monday, April 1, 2013

रंग प्यार का

क्या हर चीज़ का रंग होता है ?
अगर होता है तो कैसा होता ,
तुम्हारी याद का ,
बात का ,
मुलाक़ात का ,
हंसी का ,
गुलाबी ,पीला , नीला , हरा, नारंगी 
चितकबरा या सफ़ेद ?
कौन सा रंग चुनती ,
उस बिन छुई छुअन का ,
बिन कही दास्तां का ,
मौन के महाकाव्य का ,
कौन सा ? कौन सा ?

हुई आहट या हल्का सा खटका ,
यह तुम हो या कहीं कोई आँसू टपका ,
खिड़की पर हिला वो जो हल्के से पर्दा ,
सुनो फ़ैली हवा मे यह तेरी महक ,
यह तुम हो या मन का वहम,
हर खट- खट - पदचाप अनजानी सी ,
नहीं तू कहीं फिर भी क्यों हर बात पहचानी सी ...
कहा तुमने कि रंग है सफेद प्यार का ,
तो क्यों दिखता है पीला धब्बा वक़्त का ?
कोने पे वो छींटे लाल याद के ,
मटमैला कहीं कहीं उस इंतज़ार का ,
झूठे निकले तेरे बिन कहे वादे ,
या कहूँ कि सच था वह मौन का संवाद ......?

11 comments:

  1. आज की ब्लॉग बुलेटिन दोस्तों आपकी मदद चाहिए - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. bahut bahut shukriya is smman ka

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  2. कौन सा रंग चुनती ,
    उस बिन छुई छुअन का ,
    बिन कही दास्तां का ,
    मौन के महाकाव्य का ,
    कौन सा ? कौन सा ?

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  3. गहरी बात जिसका जवाब कठिन

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