Saturday, August 3, 2013

चल झुट्ठा.... चल झुट्ठा ..

सुनो , याद है तुम्हें जब तुमने कहा ,
मुझे तुमसे प्यार है ...
चल , झुट्ठा -- कह मै खिखिलाई ,
नहीं , तू क्यों नहीं करती मेरा यकीन ॥
सच्ची - मुच्ची ?
अच्छा बता , गर मै न मिलूँ तो ?
तो - तो मै मर जाऊंगा ... 
और भी ज़ोर से हँसी, 
उन्मुक्त झरने से - खिल खिल ,
बकवास सब ,ऐसा ,सब होता रिसालों - किताबों मे .... 
तू एसी क्यों है , क्यों नही दिखता तुझे ,
मेरा लबलबाता प्यार ...
सुन हर बार जताना ज़रूरी है क्या ?
कह , इतराती , ठुमकती चल दी वह अलबेली नार .....
आज सुनो तुम , सात समुन्द्र - पार ,
साथ हँसता - बोलता परिवार ,
मै वही , कहती , चल झुट्ठा.... चल झुट्ठा ....

12 comments:

  1. वाह , बहुत सुंदर


    यहाँ भी पधारे

    गजल
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/08/blog-post_4.html

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  2. आज सुनो तुम , सात समुन्द्र - पार ,
    साथ हँसता - बोलता परिवार ,
    मै वही , कहती , चल झुट्ठा.... चल झुट्ठा ....

    USANE KAHA THA KE STYLE MEN धत्त

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  3. http://bulletinofblog.blogspot.in/2013/08/blog-post_4.html

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  4. तो वही झुट्ठा सात समंदर पार तक .....?

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  5. ramakant singh ji ne sahi kaha!

    shandaar abhivyakti!

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  6. खुबसूरत अभिवयक्ति...... .

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  7. इसी झूठ मूठ की मनुहार में ... जिंदगी बीतती रहे ...
    आमीन ...

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