Thursday, August 4, 2011

hakikat

भुलाने की लाख कोशिश में ,
तू हर पल याद आता है |
दिन तो गुज़र जाता है मसरूफियत में ,
शाम होते ही चिरागे मोहब्बत जल जाता है |
माना कि तू है एक सतरंगी ख्वाब ,
हर रात हकीकत क्यों बन जाता है |.

Sunday, July 31, 2011

अबकी तीज

पिछली बार की तरह इस बार भी नहीं आ पाऊँगी ,
अम्मा कह देना ......
झूले की पेंग से , महावर की चमक  से ,
ढोलक की थाप से ,सावन के गीत से ,
तुलसी के चौरे  से ,आम की बौर से ,
मेहँदी की महक से , चूड़ी की खनक से ,
मेघ से - मल्हार से , गुड्डे और गुडिया से ,
पड़ोस की रधिया ताई से  , रामदीन हलवाई से ,
बचपन की सखी - सहेलियों से , भाभी -बहना से ,
हर दीवार-  कोने से , मोहल्ले के हर दरवाज़े से ,
बिट्टो तुम्हारी बहुत दूर है ,
जिम्मेवारी से भरपूर है ,
आसान  नहीं इत्ती दूर का आना ,
बच्चों की पढाई , घर की रसोई ,
रोज़ के काम , मेहमानों का आना - जाना ,
अगली बार शायद .......... आ जाये ....
अम्मा ज़रूर कह देना .............













Tuesday, July 26, 2011

Tum mere ho

तुम , सिर्फ अहसास हो कि नहीं ..
तुम , मेरे आस - पास हो कि नहीं ..
तुम , मात्र एक ख्याल हो कि नहीं ...
तुम , मन की आस हो कि नहीं ...
तुम , होठों की मुस्कान हो कि नहीं ..
तुम,शीतल मंद बयार हो कि नहीं ..
तुम , पन्नो मे दबा गुलाब हो कि नहीं ..
तुम, कही ठहरा वक़्त हो , हो कि नहीं ..
तुम , न होकर भी मेरे हो ,हो कि नहीं .....!!!! 

Thursday, July 14, 2011

dadagiri

कितने सालों से हम हैं यही डटे,
इसी कुर्सी पर बरसों से जमे |
छोटे - बड़े सभी हम से डरते ,
पकड़ी नब्ज , हर की खबर रखते ,
यहाँ की वहाँ और इधर की उधर ,
करने मे बिताता वक़्त हमारा |
हमारे एक इशारे पर ही तो ,
मिनटों में पलट जाता स्टाफ सारा |
लोग कहते हैं हमने रखा है माहोल रंगीन ,
कानाफूसी , गप्पबाजी और अफवाहों  की ,
खाते है हमारे जैसे कमाई सारी|
हमें नहीं पसंद कोई भी बदलाव ,
नई तकनीक , बदलते तरीके सब है बकवास |
जो जैसा है चलने दो ,
इस फेर - बदल से न बदलेगा इतिहास |
ये नए रंगरूट कुछ बटन दबा ,
चेंज लाना चाहते हैं .
एक फाइल अगर मिनटों में खिसक गई ,
तो उसमे क्या मज़ा है .
महीनों तक नाचे ता ता थइय्या ,
उसमें  ही तो उसकी जालिम अदा है |
बात हमारी मनो  जो जैसा है चलने दो ,
कुछ यहाँ की वहाँ कह हमें कान भरने दो |


हाय - हाय हमें ही निकाल दिया ,
ईंट- ईंट से ईंट बजा देंगे, यही धरना करवा देंगे ,
देखते हैं हमारे बिना कितना दिन यह चलते हैं |
तभी किसी ने चेताया ,जोर से हिलाया ,
कितनी बार आपको था समझाया ,
अनेकों बार "मेमो "भी भिजवाया ,
पर आप उसी पर रख चने खा गए |
अनगिनत चेतवानी का भी ,
आप पर कुछ न हुआ असर |
आज इस प्रगतिशील व्यवस्था ,
की आपने धजिय्या उड़ा दी |
खुद को आप बदल न सके और
अब कर रहे है हमी को बदनाम |
खोले अपनी आंखे और देखे चारों ओर,
आप जैसे लोगो का अब नहीं चलता जोर |
सब कुछ सामने आपके बिलकुल साफ साफ़ है ,
पूरी दुनिया के सामने आपके काम की पोल है |
छुपा नहीं है किसी से,सामने है खरा का खरा ,
ऊँगली उठाने से पहले झाँक लो अपने दामन मे भी ज़रा |
यहाँ नहीं होता किसी के साथ कोई भी भेदभाव ,
पारदर्शी है यह प्रणाली , नहीं है दबा या ढका |

Thursday, July 7, 2011

रास और रंग की महफ़िल सजाना चाहती हूँ ,
तुम राग छेड़ो, मैं गुनगुनाना चाहती हूँ |
उम्र भर का साथ नहीं है मुमकिन ,
पल - दो पल तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूँ |..

Monday, June 27, 2011

बावरी सी बूंद

बावरी सी बूंद एक
टप से माथे पर गिरी
चूम कर पलकों को
गाल छूने को चली
पल भर ठिठकी
कुछ भरमाई
एकरस हो
नयनरस से
घुल गयी अब
फिजा में ......

Saturday, June 18, 2011

Pitaa ko

अब समझ सकती हूँ ,
 कैसे   विदा किया होगा ,
अपने दिल के टुकड़े को,
 कैसे जुदा किया होगा |
जीवन जीने की कला ,
सदा मुस्कुराने की अदा ,
तुम से ही तो पाई है |
आपके आशीष ने ,
हर राह सरल बनायीं है |
छुप गए हो उन तारों के बीच ,
जो कभी तुमने मुझे दिखलाये थे |
जानती हूँ तुम हो यहीं - कहीं ,
मेरे हमेशा आस - पास | |
किस्मत है मेरी की आप बने मेरे पिता,
मेरी बुनियाद , संस्कार और मान्यता .....