Saturday, April 16, 2011

sapne

सपने सभी देखते हैं ,
कुछ सुबह होते ही ....
ओस की बूंद से पल में  ....
आँखों से धुल जाते हैं |
कुछ कोरों मे अटके ....
किरकिरी सी बन.....
पूरा दिन सताते हैं |
कुछ जुगनू की तरह ...
हरदम टिमटिमाते हैं ...
हौले - हौले से गुदगुदाते हैं |

Sunday, April 10, 2011

jai ho

बड़े जब कुछ कदम एक साथ ,


झुक गया  न्यायकर्ताओं   का परचम


वह उठा , जगा , बड़ा था अकेले ही ,

जुड़ गया पूरा देश देखते ही देखते


जय हो - जय हो - जय -अन्ना हजारे,

चले जब सब साथ तो , तुम जीते , वो हारे....!!

Wednesday, April 6, 2011

जीवन की गंध

नैनों की हलकी आंच में ,
सजाए हैं सब्ज सपने ....
होठों की मस्त धुन ने ,
गुनगुनाये हैं नए नगमे ....
मन के नर्म आंगन में ,
उगाये हैं कुछ पल अपने ....
सींचती , सवांरती , सहेजती ,
बिखरी , बहती , जीवन की गंध ........!!

Sunday, March 20, 2011

आज चाँद

अम्बर पर धीरे - धीरे सरकता चाँद ,
मेरे घर के आंगन मे आ गया ,
अंजुरी जो बनायीं हाथों की ,
तो मेरे और भी करीब आ गया ,
चांदनी में भीगे मेरे सपने ,
आँखों मे जुगनू बन चमकने लगे |
पत्तों से झरती झर - झर किरणें ,
घुलकर सांसों में बहने लगी ,
सर्द - तूफानी एकाकी  रातों मे,
तेरी चाहत की गर्माहट भरने लगी |

Saturday, March 19, 2011

अबकी होली

अबकी होली , कोई याद आ गया ,
सपना जिसका , रातों को जगा गया |
गुलाल हुए गाल , जिसकी तपन  से ,
बहके नयन , जिसकी छुअन से |
बाँहों के तंग घेरे में , जिसकी सिहरते  रहे ,
कसमसाते हम रहे , मुस्कुराते वे रहे |
भीग गया मन , पलक से मोती छलक गया ,
फागुनी इस मौसम में , कोई याद आ गया |

Friday, March 18, 2011

कैसी यह होली ?

कैसी  है यह होली ?
सुनामी का है प्रहार ,
बमों की है बौछार ,
इन्सान ही इनसान से ,
खून भरी खेल रहा होली |
डर - आतंक के साये में,
सहमे - सहमे हैं जन |
बारूद - घृणा की गंध है फैली ,
जल रहे है देश- तड़पे हैं मन |
क्यों नहीं रंगों की तरह ,
हम भी आपस में मिल जाते |
प्रेम , भाईचारे , सदभावना 
के सन्देश हवा में घुल जाते |


Thursday, March 17, 2011

mera ithhas

मैं, न सीता , न राधा,


न ही कुंती या कैकेयी ,

साधारण - सरल नारी


जीवित हूँ , इक विश्वास पे ,

दो मीठे बोलो के प्यार पे ,

घायल कर दे ऐसे नश्तर नहीं ,

चीर दे दिल वो तेवर नहीं


तेरे साथ जुड़ा, मेरा अस्तिव ,

मेरा तन , मेरा मन ,

मेरी वेदना, मेरा अहं....


फिर क्यों ऐसा हुआ ,

तुम अपने मे ही मगन

प्रशन करता है आज ,

मुझसे ही मेरा इतिहास ...........