Friday, September 23, 2011

Bisat

जिंदगी की बिसात पर ,
मोहरे से हम ..
एक घर मैं चली ,
ढाई घर चले तुम ...

Monday, September 19, 2011

साथ - साथ

पाप - पुण्य,
दोनों ही बहते हैं ,
गंगा जी में ....
साथ - साथ , एक साथ .....
धोने को ,
या 
कमाने को ....
मकसद चाहे जो भी हो ,
डुबकी तो दोनों ,
लगाते हैं साथ - साथ .....
हर - हर गंगे , हर - हर गंगे ,
बुद - बुदाते धीमे - धीमे ...
शांत - मौन मन ही मन ...
चीखते - चिल्लाते शोर ही शोर ...
पाप - पुण्य ,
दोनों ही बहते हैं ,
गंगा जी में ....
साथ - साथ ....एक साथ ....!


Wednesday, September 14, 2011

maun

मौन 
इसकी आवाज़ 
खुद ही सुनती हूँ 
करती हूँ स्वयं ही 
विषलेषण,,
ढून्ढतीहूँ ,
अनुतरित्त उत्तर ..
अपने सवालों से 
आप ही जूझती 
पाती हूँ हर बार 
अलग ही जवाब ....

Wednesday, September 7, 2011

एक बार फिर ....

एक बार फिर ....
फिर दहली धमाकों से दिल्ली ,
फिर लग गया रेड अर्लट सडकों पर ,
फिर मारी गई मासूम जनता बिचारी |
हो रही सत्ता के गलियारों में ,
आरोपों - प्रत्यारोपों की बौछार |
आखिर ऐसा क्यों होता है बार -बार ,
इतने बड़े शक्तिशाली तंत्र की ,
हर बार उड़ जाती हैं धजिय्याँ |
अपनी ही परछाई से सहमा है जन ,
डरी-डरी सूरतें ,हर आंख  हैं नम |
एक बार फिर कायर माँ को रौंद गए ,
हमारे सयंम को झंकार गए |
कब तक आखिर --- कब तक ...
बंद  करो यह मरने - मारने का व्यापार..
बंद करो यह अत्याचार ..बंद करो ....अब बस बंद करो .......

Friday, August 19, 2011

ab to aa jao

भर आया है प्यार मेरा ,
इन नैनों के कोरों तक ,
अब तो आ जाओ साजन,
सांसें न रुक जाये भोर होने तक |
माथे पर मेरे अगर ,
लबो का  तेरे हो कुमकुम ,
ह्रदय  मे गूंजे हल्का सा श्रृंगार ,
ठहर जाये धरती ,थम जाये अस्मा |
बाँहों की तेरी अगर,
मिल जाये चन्दनहार ,
आँखों मे तेरी देखूँ ,
डूब कर भी ,पा जाऊ सारा संसार |

Tuesday, August 9, 2011

Zindgi badal rahi hae

जिंदगी बदल रही है , जिंदगानी बदला रही है ,
तेरे - मेरे जीने की कहानी बदल रही है |
एक की कमाई पर चलता था घर ,
अब सब की भी कम पड़ रही है |
नज़र बदल रही है , नज़रिया बदल रहा है ,
नज़रंदाज़ करने का तरीका बदल रहा है |
कहते थे कभी , खा कर जाना ,
अब सुनते हैं "आप खा कर आए होंगे |
बातें होती थी आमने - सामने कभी ,
अब हर किसी से नज़रे चुरा कर मिला रहे हैं |
पोशाक बदल रही है , पहनावे बदल रहे हैं ,
छिपाने की बजाय, दिखाने के अंदाज़ बदल रहे हैं |
रिश्ते बदल रहे हैं , नाते बदल रहे हैं ,
जन्म जन्मातर के साथी बदल रहे हैं |
इसमें आश्चर्य क्या ,
और अचम्भा क्यों ,
वक़्त के साथ ...हम भी बदल रहे हैं .......

Sunday, August 7, 2011

तुम्हारी बड़ी

प्रिय भैय्या ,
राखी - टीका जो भिजवाया था ,
वह अब तक मिल गया होगा |
उसके साथ रखा कार्ड ,
मैने खुद बनाया है ,
अपने हाथों से सजाया है ,
जैसे बरसों पहले ,
तुम्हारे माथे पर ,
रोली - चावल का तिलक सजाती थी |
अब, छोटी से बँधवा लेना ,
और मेरा शगुन भी उसे ही दे देना |
बचपन में ग्यारह रूपए से लेकर ,
कॉलेज में पाँच सौ रूपए मिलने तक |
याद है मैं कितना लड़ जाया करती थी ,
बड़ी होने की धौंस दिखा कर ,
सदा  ज्यादा  ही वसूल कर पाती थी |
पापा भी हमेशा हँस कर कहते ,
अरे मुँह न फुला ,तेरा हक़ है ,ले -ले |
माँ पर आँख दिखा समझाती थी ,
जो मिले , उसमें खुश रहना सीख |
पापा का बटुआ ले माँ को चिढ़ाती,
कमरे से हवा हो जाती थी |
तब नहीं नहीं समझी थी ,
अब समझ गयी हूँ |
नहीं  कुछ नहीं चाहिए ,
बस तुम्हारी कलाई का स्पर्श ,
माथे की छुअन .
और ...
मेरे गाल पर हलकी सी चपत |
हर बार की तरह , इस बार भी ,
वह भी छोटी को दे देना |
तुम्हारी बड़ी .........!!