तुम्हारी पेशानी पर झलकते ,
स्वेद - बिन्दुओ को ,'
आँचल मे सह्जेने को जी चाहता है
जी चहता है ,
स्वेद - बिन्दुओ के हेतु
सिमट आए मेरे आँचल मे ,
तो यह आँचल सार्थक हो
तुम्हारे राज में हमराज बन
खो जाने को जी कहता है
जी कहता है ऐसे ही खो जाने से
महामिलन की अनुभूति ,
प्राप्त हो मुझे भी एक ब़ार
पलको पर घिर आए ,
तुम्हारे इस गीलेपन को
पी जाने को जी कहता है
जी कहता है
और यह प्रयास
बन जाए प्रतीक
हमारे अनंत में खो जाने का
तुम और में का विभाजन
समाप्त कर ,
तुम से मे , में कहलाऊ
जी कहता है
इति.....................
स्वेद - बिन्दुओ को ,'
आँचल मे सह्जेने को जी चाहता है
जी चहता है ,
स्वेद - बिन्दुओ के हेतु
सिमट आए मेरे आँचल मे ,
तो यह आँचल सार्थक हो
तुम्हारे राज में हमराज बन
खो जाने को जी कहता है
जी कहता है ऐसे ही खो जाने से
महामिलन की अनुभूति ,
प्राप्त हो मुझे भी एक ब़ार
पलको पर घिर आए ,
तुम्हारे इस गीलेपन को
पी जाने को जी कहता है
जी कहता है
और यह प्रयास
बन जाए प्रतीक
हमारे अनंत में खो जाने का
तुम और में का विभाजन
समाप्त कर ,
तुम से मे , में कहलाऊ
जी कहता है
इति.....................
खूबसूरत ख्वाहिशें :)
ReplyDeleteवाह उम्दा अनुभूति
ReplyDeletebahut bahut shukriyaa...
ReplyDeleteजहां प्रेम हो तुम और मैं की दूरी कहाँ रह जाती है ... वो तो वैसे भी एक हो जाता है ...
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