Wednesday, November 9, 2011

mera pyaar kam nahi..........

आखिर क्यों तुम कभी समझ नहीं पाए मेरी मज़बूरी को ,
क्यों नहीं देख पाए डब डबाती आँखों मे, 
कितना प्यार था , कितनी थी प्रीति,
दिखी तो दिखी बस आग और गर्मी ,
क्यों कर नहीं देख सके चारपाई से लगी माँ ,
और मेरी पीठ पर चिपके मेरे पिता,
विधवा सी दिखती बड़ी बहन ,
और इन सबके बीच झूलती मैं ...
क्यों नहीं समझ पाए चाह कर भी नहीं सींच पाई,
इश्क के इस पौधे को ,
प्रेम मेरा तुम से ज्यादा नहीं तो कम भी न था ,
फर्क है इतना कि अनेक बन्धनों मैं जकड़ा था ,
क्या करती कैसे छोड़ पाती यह सब ,
वक़्त ही न मिला की समझा जाती कुछ ,
पर अब भी एक आस बाकी है ,
जब तक है सांस मिलने का आसरा है ,
मरी नहीं है जड़ यकीं है मुझे ,
सीचा इसे दिल के आसुओं से हमने ..

Wednesday, November 2, 2011

भविष्य मेरा

तुम्हारे अधरों का स्पर्श ,
मंद- मंद , मृदुल ..
बालों, गालों, पलकों पर ,
कोमल , सुकुमार , सौम्य, नर्म ....
होठों को कोरों से ...
कानों की लौ तक ...
कमसिन , नाज़ुक , उदार ..
धीरे - धीरे , सहराता,
टटोलता - शनै: - शनै:......
जैसे छू रहा हो कोई ,
उँगलियों के पोरुओं से ,
शिला पर उकेरे अक्षर ,
पढ़ रहा हो एक - एक इबारत ,
पूरा इतिहास गढ़ा है जहाँ ,
औ फिर ,
मद्धिम वह चुम्बन ,
रच गए तभी ,
भविष्य तुम ...मेरा ..!!!!! 
इति

Friday, October 28, 2011

daan maen mila saaman

मैं सिर्फ एक चेहरा नहीं , जो सिर्फ सजाया जाये.... ..
मैं कोई मोहरा नहीं, जो सिर्फ बिसात पर चलाया जाये....
हसरत नहीं सिर्फ चाहत नहीं ,सदाओं पर कोई पहरा नहीं ..
एक रिश्ता नहीं सिर्फ तेरी जायदाद नहीं ,इंसा हु पुतला नहीं....
दिल टूट जाये ,रूह बिखर जाये ,सब बाकी बेजान रह जाये....
खोलो आँखें और करलो पहचान ,मैं दान मैं मिला सामान नहीं 

Monday, October 24, 2011

अपनी दिवाली


दिवाली के बाद का दिन कितना अच्छा होता है ,
सुबह - सवेरे निकल जाते हैं गली - मोहल्ले में ,
मिल जाते हैं कितने ही अधजले अनार ,पटाखे ,
स्याह - बुझी तीली से सटी कुछ फुलझड़ी ,
या कुछ अनफूटे - साबुत चकरी या बम ,
जूठन के ढेर में बची - खुची मिठाई ,
खील- बताशे , बर्फी या लड्डू एकाध ,
पार साल तो चली थी हवा बेशुमार ,
पा गए थे पूरा तेल और दिए अपार,
अम्मा ने भी तली थी पूरी- कचोरी और,
हमने जलाई थी रंग- बिरंगे दीपों की कतार,
खूब जम के होती है दिवाली हर बार ,
अपनी बस्ती भी करती है हुल्लड़ ,
दिवाली के बाद ..........हर बार ...............!!!!!

Thursday, September 29, 2011

कौन हूँ मैं...हूँ मैं कौन ?

कौन हूँ मैं...हूँ मैं कौन ?
तेरी निरंतर सहचरी ,
मेरे ही कारण तू होता है सुखी ,
या मैं कर जाती हूँ तुझे दुखी ..
तेरी सबसे बड़ी मददगार ,
या फिर तुझ पर एक बोझ ,
मैं चाहूँ तो तू छू जाए अस्मा ,
या फिर चाटे तू पल भर मैं धूल..
मैं तो हूँ तेरी मुलाजिम |
राज करना मुझ पर बहुत ही है आसान,
थोड़ा सा सयंम , औ कड़ा विचार ,
मैं हूँ तेरे हुक्म की गुलाम ..
अपनाओ मुझे ,लगाओ गले से ,
अटल , अचल , अविचल ,स्थिर ,
मजबूत , अगर रहो तुम तो ..
रख दूँ तुम्हारे पैरों  पे संसार ,
मत डगमगाना , न ही देना कोई ढील,
मैं तो रहती हूँ तेरे भीतर .....मैं हूँ तेरी ....
आदत 

Saturday, September 24, 2011

shai rup

कभी पूजा देवी के रूप में ,
कभी दुत्कार दासी के रूप में ,
इस ऊँच - नीच के मध्य झूलते ....
सहधर्मिणी का रूप न दे सके |
परेशान खींसे निपोरते इधर - उधर झाँकते..
कोरा नाटक
भोथरा छल
झूठा  प्रपंच
वास्तव में समानता कभी मान ही नहीं सके |
त्रिशंकु से
अपने में ही उलझे ...
मेरे हर रूप को माना मेरे धर्म ..मेरा फ़र्ज़...मेरा कर्तव्य ...
हाँ , मैं माँ हूँ ...
अथक पीड़ा के उपरांत किया सर्जन ..
हाँ , मैं बहन हूँ ...
सूनी कलाई सजा , घर   को बनाया  चमन ..
हाँ , मैं बेटी हूँ ...
नमकीन शरारतों से महकाया तेरा मन ...
हाँ , मैं पत्नी हूँ.....
एक आस - विश्वास पर छोड़ा  बाबुल का आंगन ....
हाँ , मैं वो सब हूँ , जैसा तुमने चाहा ,
कभी करो मेरी चाहत,
पर भी गौर .....
व्यर्थ ही नहीं मचाते हम शोर.........

Friday, September 23, 2011

Bisat

जिंदगी की बिसात पर ,
मोहरे से हम ..
एक घर मैं चली ,
ढाई घर चले तुम ...