उनका मन बहुत दयालू है ,
प्रतिमाह फटी - पुरानी उतरन ,खिलौने ,
पास की झोपड़ -पट्टी में दे आती हैं |
पहनने वालों का तो पता नहीं ,
वह स्वयं अख़बारों में छप जाती हैं |
उनका मन बहुत उदार है ,
प्रतिवर्ष एक डरा- सहमा बालक ,
गाँव से उधार ले आती हैं ,
बच्चे का तो पता नहीं ,
वह स्वयं तारीफ़ तले दब जाती हैं |
उनका मन बहुत कोमल है ,
हर हफ्ते नारी निकेतन के चक्कर लगाते हैं ,
किसी मासूम कन्या को ,
अपने माली की बीवी बना लाते हैं|
माली का तो पता नहीं ,
वह रोज़ ताज़े गुलदस्ते सजवाते हैं |
इति.....